Thursday, 21 April 2011

कलम उठी कविता लिखने

कलम उठी कविता लिखने को शीर्षक भरमार मिले
चाहत थी जिनको लिखने की वे आहात विमार मिले

 देश का यारों क्या होगा, जब अपनी खिचड़ी पकानी है
अन्ना जैसे गाँधी पर भी, जब बेजुबानी फब्त्ती करनी है 

आईने  को झुठलाने की आदत,  हमें छोड़नी होगी 
तबियत से आगे आकर, नयी पहल जब करनी होगी   

खादी और  आबादी को,   अब मिलकर हाथ बढ़ाना है
सपनो के भारत से अब तो  , भ्रस्ताचार मिटाना है